शिलापट्ट पर प्रचार की स्याही, सवाल उठे तो मिटाने की कवायद
प्रतापगढ़। मांधाता ब्लॉक में क्षेत्र पंचायत निधि से कराए गए विकास कार्यों के शिलापट्ट को लेकर राजनीतिक प्रचार और नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सरकारी धन से लगाए गए कुछ शिलापट्टों पर पदेन अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ ऐसे नामों को भी प्रमुखता दी गई, जिनकी पदेन भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि सरकारी योजना के शिलापट्ट पर व्यक्तिगत प्रचार की गुंजाइश क्यों रखी गई?
मामला तब चर्चा में आया जब इस संबंध में खबर प्रकाशित हुई। इसके बाद कुछ शिलापट्टों पर लिखे नामों को मिटाने या बदलने की कवायद की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे सवाल और गहरा गया है कि यदि नाम नियमसम्मत थे तो उन्हें हटाने की जरूरत क्यों पड़ी और यदि नियमसम्मत नहीं थे तो उन्हें लिखने की अनुमति किस स्तर से मिली?
मामला केवल नाम मिटाने तक सीमित नहीं है। जरूरत है कि संबंधित विभाग जांच कर स्पष्ट करे कि शिलापट्ट तैयार कराने का आदेश किसने दिया, नामों को किस आधार पर स्वीकृति मिली, निर्माण में कितना खर्च हुआ और बाद में नाम हटाने का निर्देश किसके स्तर से जारी हुआ।
सरकारी योजनाएं जनता के धन से संचालित होती हैं। इसलिए शिलापट्ट पर दर्ज नामों और खर्च की पारदर्शिता भी सार्वजनिक होनी चाहिए। सवाल उठने के बाद नाम मिट सकते हैं, लेकिन उठे सवालों का जवाब देना जरूरी है।

